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रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद आरबीआई की अगली चाल क्या होगी?
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से ब्याज दर बढ़ाने का समर्थन किया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में दर में और वृद्धि या स्थिरता की संभावना अधिक है।
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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने कड़ी नीति के अपने रुख को और मजबूत किया है। समिति के सभी सदस्यों ने रेपो रेट में बढ़ोतरी के लिए मतैक्य व्यक्त किया है, जो केंद्रीय बैंक के संकुचनवादी रुझान को दर्शाता है।
आरबीआई की ओर से दिए गए संकेत के अनुसार, आने वाली नीति समीक्षाओं में या तो दर में और वृद्धि की जा सकती है या फिर वर्तमान स्तर पर रोक लगाई जा सकती है। यह स्पष्ट संदेश है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना नहीं रही। इस दृष्टिकोण से बाजार में मुद्रा की उपलब्धता सीमित रहने और उधार लागत में वृद्धि की स्थिति बनी रहेगी।
विश्लेषकों के अनुसार, यह नीतिगत बदलाव मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की आरबीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उच्च दरें महंगाई को दबाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इसका असर अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर भी पड़ सकता है।
रेपो रेट में कितनी और बढ़ोतरी संभव है, यह आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के रुझान और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। वर्तमान में, बाजार सहभागी और अर्थविदों की दृष्टि इन संकेतकों पर केंद्रित है।