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भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए लीवरेज अनुपात मानदंड में संशोधन किया
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लीवरेज अनुपात के नए मानदंड जारी किए हैं। यह नया ढांचा अप्रैल 2027 से लागू होगा।
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भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग क्षेत्र के लिए संशोधित लीवरेज अनुपात नियम घोषित किए हैं। नए मानदंडों के तहत घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण बैंकों (डी-एसआईबी) के लिए न्यूनतम लीवरेज अनुपात 4 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जबकि अन्य बैंकों के लिए यह आवश्यकता 3.5 प्रतिशत रखी गई है।
यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगी। लीवरेज अनुपात बैंकों की कुल संपत्ति के सापेक्ष उनकी पूंजी का अनुपात दर्शाता है। इस मानदंड का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
डी-एसआईबी श्रेणी में वे बैंक शामिल होते हैं जिन्हें भारतीय वित्तीय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इन बैंकों पर अधिक कठोर पूंजी आवश्यकताएं लागू की जाती हैं। संशोधित नियम बैंकों को नई आवश्यकताओं के अनुरूप ढलने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करते हैं।
रिजर्व बैंक का यह कदम वैश्विक बैंकिंग मानकों के अनुरूप बैंकों की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में है। नए मानदंड सभी प्रकार की वित्तीय जोखिमों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होंगे।