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व्यक्तित्व विकास की बुनियाद है पढ़ने की आदत: पूर्व कुलाधिपति
विजयनगरम रीड्स कम्युनिटी के मानद अध्यक्ष डॉ. हनुमंतु लाजपथिराय ने माता-पिता से बच्चों में प्रारंभिक पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पठन केवल शिक्षा नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।
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विजयनगरम के शिक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ विद्वान डॉ. हनुमंतु लाजपथिराय ने जोर देकर कहा है कि बचपन से ही पुस्तकों के प्रति लगाव पैदा करना बेहद आवश्यक है। उनके अनुसार, पठन की आदत बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास का मूल आधार बनती है और उनकी सोच को तीक्ष्ण करती है।
विजयनगरम रीड्स कम्युनिटी के मानद अध्यक्ष के रूप में, डॉ. लाजपथिराय का मानना है कि आधुनिक समय में जब डिजिटल माध्यम बच्चों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, तब माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने परिवारों से अपील की है कि वे बच्चों को नियमित पठन के लिए प्रेरित करें।
इस शिक्षाविद के अनुसार, पुस्तकें पाठकों को कल्पनाशील, विवेकशील और आत्मविश्वासी बनाती हैं। प्रारंभिक वर्षों में पढ़ने की संस्कृति के प्रति रुचि जागृत करने से बच्चों का बौद्धिक विकास तेजी से होता है और उनकी भाषा कौशल में वृद्धि होती है।
डॉ. लाजपथिराय का यह दृष्टिकोण समाज में साक्षरता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनका संदेश विशेषकर उन अभिभावकों के लिए प्रासंगिक है जो अपने बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित करना चाहते हैं।