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विवाह से इंकार करना आत्महत्या का उकसावा नहीं: सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि किसी महिला से विवाह करने से इंकार करना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसावा देने का अपराध नहीं माना जा सकता। यह फैसला एक महिला की आत्महत्या से जुड़े मामले में आया है।

LSN India · 9 October 2026

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह करने से मना करना अपने आप में किसी की आत्महत्या का कारण नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या के लिए उकसावा देने का अपराध साबित करने के लिए अन्य तत्वों की आवश्यकता होती है।

यह मामला एक महिला की आत्महत्या से संबंधित था जो लगभग तीन महीने तक अपने कथित प्रेमी के साथ रह रही थी। इस घटना के बाद आत्महत्या के लिए उकसावा देने का आरोप लगाया गया था।

न्यायालय ने अपने निर्णय में व्यक्त किया कि किसी व्यक्तिगत संबंध में विवाह के लिए सहमति न देना एक व्यक्तिगत अधिकार है। इसे कानूनी रूप से किसी को आत्मघाती कदम उठाने के लिए उकसाने के समान नहीं माना जा सकता।

इस फैसले से वे मामले प्रभावित होंगे जहां विवाह से इंकार को आत्महत्या के लिए एकमात्र कारण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आत्महत्या के लिए उकसावे का आरोप साबित करने के लिए अधिक ठोस और प्रत्यक्ष सबूत आवश्यक हैं।