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धार्मिक रूपांतरण से अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रभावित होता है: अलाहाबाद हाईकोर्ट
इस्लाम में धर्मांतरण के बाद महिला का अनुसूचित जनजाति का सदस्यता समाप्त हुई या नहीं, इसी सवाल पर अलाहाबाद हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट ने कृषि भूमि की बिक्री से संबंधित तीन याचिकाएं खारिज कर दीं।
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अलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में कृषि भूमि की तीन खरीद-बिक्री से जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत के उन आदेशों को बरकरार रखा जिनमें ये लेनदेन शून्य घोषित किए गए थे।
इस मामले के केंद्र में यह सवाल था कि जब भूमि विक्रय दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए, तो याचिकाकर्ता महिला भुइयां अनुसूचित जनजाति की सदस्य मानी जा सकती थी या नहीं। सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है कि वह एक मुस्लिम व्यक्ति से विवाह के बाद इस्लाम में परिवर्तित हो गई थी।
अनुसूचित जनजाति का दर्जा धार्मिक सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना पर आधारित होता है। कोर्ट के इस फैसले से यह सवाल उठता है कि धर्मांतरण के बाद किसी व्यक्ति की अनुसूचित जनजाति की सदस्यता पर क्या असर पड़ता है।
यह निर्णय संवैधानिक प्रावधानों और अनुसूचित जनजाति की सुरक्षा से संबंधित कानूनों की व्याख्या का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। हाईकोर्ट का यह फैसला भारत के विभिन्न क्षेत्रों में समान मामलों को प्रभावित कर सकता है।