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इस्लाम धर्म परिवर्तन से पिछड़ी मुस्लिम श्रेणी का दर्जा नहीं मिलेगा: मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि धर्म परिवर्तन के माध्यम से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को पिछड़ी मुस्लिम श्रेणी का दर्जा प्राप्त नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि कुरान की शिक्षाओं के अनुसार समाज में समानता होनी चाहिए।

LSN India · 25 August 2026

इस्लाम धर्म परिवर्तन से पिछड़ी मुस्लिम श्रेणी का दर्जा नहीं मिलेगा: मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि धर्म परिवर्तन के जरिए इस्लाम स्वीकार करने वाले व्यक्ति को पिछड़ी मुस्लिम श्रेणी का संवैधानिक सुरक्षा और लाभ नहीं दिए जा सकते। न्यायालय ने इस मामले में कुरान की शिक्षाओं का हवाला देते हुए अपना फैसला सुनाया।

अदालत के अनुसार किसी धार्मिक समुदाय के भीतर विभिन्न वर्गों को आगे और पिछड़ा घोषित करना कुरान की मूल शिक्षाओं के विपरीत है। इस्लाम धर्म का मूल सिद्धांत एक समतामूलक समाज की स्थापना करना है, जहां सभी व्यक्ति समान अधिकार रखते हैं।

यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां धर्म परिवर्तन के बाद सामाजिक और शैक्षणिक लाभों के लिए आवेदन किए जाते हैं। न्यायालय का यह फैसला सांविधानिक मानदंडों और धार्मिक सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करता है।

इस मामले का निहितार्थ यह है कि अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ी जातियों से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्तियों के मामले में सरकारी सुरक्षा और सुविधाओं का प्रश्न अधिक जटिल हो जाता है। अदालत का यह निर्णय देश के विभिन्न धर्मों और समुदायों में समानता के सिद्धांत को मजबूत करता है।