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देहरादून: गिद्धों के लिए 2.4 किमी की दूरी जीवन और मौत के बीच
देहरादून के पास सुधौवाला में पशु शवों के डंप को विद्युत लाइनों से दूर स्थानांतरित करने से गिद्धों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। एक दशक लंबे अध्ययन से यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है।
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पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक सकारात्मक विकास सामने आया है। देहरादून क्षेत्र में पशु शवों के डंप को विद्युत लाइनों से दूर स्थानांतरित करने का निर्णय गिद्धों के संरक्षण में प्रभावी साबित हुआ है। हाल ही में प्रकाशित एक दशक लंबे अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सुधौवाला क्षेत्र में किए गए इस स्थानांतरण से पक्षियों की मृत्यु दर में कमी आई है।
शवों का डंप पहले उच्च वोल्टेज विद्युत लाइनों के पास स्थित था, जहां गिद्ध आहार के लिए आते समय बिजली के झटके का शिकार बन जाते थे। शोधकर्ताओं के अनुसार नया स्थान मूल स्थान से लगभग 2.4 किमी दूर है, जो गिद्धों के लिए जीवन रक्षक साबित हुआ है।
गिद्ध भारत की पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। पिछले दशकों में इनकी संख्या में भारी गिरावट देखी गई है, जिससे वन्यजीव संरक्षणकर्ताओं को गहरी चिंता है।
सुधौवाला में किया गया यह प्रयोग अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के संरक्षण उपाय अपनाने के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सरल लेकिन प्रभावी कदम गिद्ध आबादी को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।