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अलास्का के द्वीप पर बारहसिंगों की आबादी का विनाश: अतिचारण की त्रासदी
1944 में अलास्का के सेंट मैथ्यू द्वीप पर छोड़े गए 29 बारहसिंगे दशकों में 6,000 से अधिक तक पहुंच गए। लेकिन भोजन की कमी और कठोर सर्दियों ने पूरी आबादी को समाप्त कर दिया।
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अलास्का के रिमोट सेंट मैथ्यू द्वीप पर एक पारिस्थितिक त्रासदी ने प्रकृति के संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण सबक दिया। 1944 में इस द्वीप पर छोड़े गए महज 29 बारहसिंगे (रेनडियर) की आबादी बिना किसी शिकारी के दो दशकों में अविश्वसनीय रूप से बढ़कर 6,000 से अधिक हो गई।
हालांकि, इस तीव्र वृद्धि के गंभीर परिणाम हुए। द्वीप पर बारहसिंगों का यह विशाल झुंड अपने मुख्य भोजन स्रोत - लाइकेन (काई) का अत्यधिक दोहन करने लगा। अतिचारण की वजह से द्वीप की वनस्पति तेजी से क्षतिग्रस्त हुई और भोजन की गंभीर कमी उत्पन्न हुई।
1963-1964 की सर्दियों में आई विपत्ति ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया। भीषण ब्लिजार्ड और गहरी बर्फ ने बारहसिंगों को अपने पहले से ही सीमित भोजन स्रोतों तक पहुंचने से रोक दिया। कड़ाके की ठंड और भूख की मार से पूरी आबादी समाप्त हो गई।
यह घटना पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन और प्राकृतिक नियंत्रण तंत्र के महत्व की एक दुर्दांत स्मृति बनी गई। द्वीप अंततः इन जानवरों से पूरी तरह खाली हो गया, जो अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि के विनाशकारी परिणामों का जीवंत उदाहरण बन गया।