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शमसुद्दीन अपने महाविद्यालय लौटे, सांस्कृतिक केंद्र बनने का आह्वान
प्रख्यात व्यक्तित्व शमसुद्दीन ने अपने पूर्व महाविद्यालय का दौरा किया और शिक्षण संस्थानों से सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कॉलेजों को केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के मंच बनने चाहिए।
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शमसुद्दीन ने अपने शिक्षा जीवन के दौरान अध्ययन के महाविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेते हुए विभिन्न हितधारकों को संबोधित किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आधुनिक भारतीय शिक्षा प्रणाली को पारंपरिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के साथ जुड़े रहने की आवश्यकता है।
महाविद्यालय में अपने समय को याद करते हुए, शमसुद्दीन ने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को स्थानीय कला, साहित्य, संगीत और नृत्य को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इससे न केवल छात्रों का समग्र विकास होगा बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होगी।
उन्होंने शिक्षकों और प्रशासकों से अपील की कि वे पाठ्येतर कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाएं। शमसुद्दीन के अनुसार, यह दृष्टिकोण युवाओं को न केवल रोजगार के लिए बेहतर तैयारी करेगा बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक भी बनाएगा।
महाविद्यालय प्रशासन ने शमसुद्दीन के सुझावों का स्वागत किया और आने वाले वर्षों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दिखाई।