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होम लोन में चेतावनी: EMI समान रहे, पर कर्ज अवधि बढ़ सकती है
रेपो रेट में वृद्धि से होम लोन लेने वाले ग्राहकों को अधिक ब्याज दर का सामना करना पड़ सकता है। बैंकों के EMI स्थिर रखने के फैसले से कर्ज की अवधि लंबी हो सकती है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति के तहत रेपो रेट में बढ़ोतरी से होम लोन लेने वाले ग्राहकों को नई वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कई बैंक अपने ग्राहकों के मासिक किश्तें यानी EMI को एक जैसी रखने का विकल्प दे रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह है कि कुल कर्ज चुकाने की अवधि में वृद्धि हो रही है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ग्राहक अपनी EMI को समान रखने का विकल्प चुनता है, तो उसे अधिक ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा क्योंकि ब्याज दरें अधिक हैं। इस स्थिति में, मूलधन की चुकौती धीमी गति से होती है, जिससे कुल कर्ज अवधि बढ़ जाती है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समय में उधारकर्ताओं को अपने विकल्पों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए। EMI को स्थिर रखने, इसे बढ़ाने, या कर्ज अवधि बढ़ाने के बीच चुनाव करते समय दीर्घकालीन वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
रेपो रेट में प्रत्येक वृद्धि से होम लोन की कुल लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए, नए कर्ज लेने या मौजूदा लोन को रीफाइनेंस करने पर विचार करने वाले ग्राहकों को बाजार दरों और अपनी वित्तीय क्षमता का गहन विश्लेषण करना चाहिए।