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मानव बुद्धिमत्ता का सात दशक पुराना 'छिपकली मस्तिष्क' सिद्धांत चुनौती में

वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क के विकास से जुड़े एक लंबे समय से प्रचलित सिद्धांत पर सवाल उठाया है। यह नया शोध मस्तिष्क की संरचना और बुद्धिमत्ता के विकास को समझने के तरीके को बदल सकता है।

LSN India · 7 September 2026

मानव बुद्धिमत्ता का सात दशक पुराना 'छिपकली मस्तिष्क' सिद्धांत चुनौती में

वैज्ञानिक समुदाय में एक महत्वपूर्ण विमर्श खड़ा हो गया है जहां शोधकर्ताओं ने सात दशक पहले प्रतिपादित 'सरीसृप मस्तिष्क' सिद्धांत को चुनौती दी है। यह सिद्धांत यह मानता था कि मानव मस्तिष्क के प्राचीन भागों ने बुद्धिमत्ता के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई थी। हालांकि, नई खोजें इस पारंपरिक समझ के विपरीत संकेत दे रही हैं।

विभिन्न न्यूरोबायोलॉजिकल अध्ययनों के माध्यम से वैज्ञानिकों ने पाया है कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली अधिक जटिल और एकीकृत है। प्राचीन और आधुनिक मस्तिष्क के भाग आपस में कहीं अधिक घनिष्ठ तरीके से काम करते हैं जितना कि पहले माना जाता था। इससे यह संकेत मिलता है कि बुद्धिमत्ता के विकास के पीछे केवल एक ही क्षेत्र जिम्मेदार नहीं है।

इस खोज से न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में एक नया दृष्टिकोण उभरने की संभावना है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मानव संज्ञानात्मक क्षमताओं को समझने के लिए हमें मस्तिष्क के सभी हिस्सों के बीच सामंजस्य पर ध्यान देना चाहिए। यह नई समझ मनोविज्ञान, न्यूरोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अध्ययन में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।