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म्यूचुअल फंड में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी दूसरे साल घट रही है
भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों का प्रभाव बढ़ रहा है, जबकि खुदरा निवेशकों की भागीदारी लगातार घट रही है। पिछले पांच वर्षों में निष्क्रिय निवेश रणनीति में एचएनआई का हिस्सा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
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भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेशकों की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि खुदरा निवेशकों की समग्र संपत्ति प्रबंधन में हिस्सेदारी दूसरे साल लगातार सिकुड़ रही है, जिससे बाजार में असमानता की प्रवृत्ति उजागर होती है।
इसी अवधि में उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्ति और संस्थागत निवेशक म्यूचुअल फंड में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहे हैं। विशेषकर निष्क्रिय निवेश या इंडेक्स-आधारित फंडों में एचएनआई का संचयी बढ़ाव पिछले पांच सालों में बेहद आक्रामक रहा है।
खुदरा निवेशकों की भागीदारी में कमी की यह प्रवृत्ति वित्तीय बाजारों में असमानता के व्यापक विषय को दर्शाती है। विश्लेषकों का मानना है कि निवेश में सुविधा और प्रौद्योगिकी की पहुंच संपन्न वर्गों के पक्ष में काम कर रही है। इसके बावजूद, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री समग्र रूप से विकास की ओर अग्रसर है, जहां कुल संपत्ति प्रबंधन में वृद्धि जारी है।