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चुनाव आयोग को समर्थन, सेवानिवृत्त अफसरों ने उठाए सवाल
देश के सेवानिवृत्त IAS और IFS अफसरों ने एक खुली चिट्ठी जारी करते हुए कहा है कि चुनाव प्रक्रिया की अखंडता पर संदेह करने के लिए ठोस प्रमाण होने चाहिए। उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली की गरिमा की रक्षा का आह्वान किया है।
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भारत के चुनावों की विश्वसनीयता के मुद्दे पर सेवानिवृत्त सिविल सेवकों ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। इन अफसरों ने कहा है कि उन्होंने अपने संपूर्ण कार्यकाल में देश की चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने चुनाव पद्धति का विकास, मतदान दलों का प्रशिक्षण, मतगणना कक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिणामों की निगरानी में अपना योगदान का उल्लेख किया है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुसार, चुनाव प्रणाली को 'संदिग्ध' बताए जाने के दावों का समर्थन करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे गंभीर आरोपों को बिना किसी प्रमाण के प्रस्तुत करना भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करता है। इन अफसरों का मानना है कि जो लोग चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने संदेह को सपष्ट आंकड़ों और तथ्यों से समर्थित करना चाहिए।
यह बयान चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। सेवानिवृत्त IAS-IFS अधिकारियों का यह पत्र भारतीय चुनाव आयोग के कार्य की व्यावसायिकता का समर्थन करता है और संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देता है।