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सेवानिवृत्त कर्मचारी राष्ट्रपति से पेंशन वृद्धि में तेजी लाने की अपील
राष्ट्रीय पेंशनभोगी परिषद ने राष्ट्रपति से कहा है कि वह अपने नैतिक प्राधिकार का इस्तेमाल करते हुए श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ को 18 जनवरी को जारी किए गए परिपत्र को तुरंत वापस लेने का निर्देश दें।
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राष्ट्रीय पेंशनभोगी परिषद (एनसीपीए) ने सरकारी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ओर से राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वह पेंशन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर तुरंत हस्तक्षेप करें। परिषद का कहना है कि राष्ट्रपति को अपने "सम्मानित नैतिक प्राधिकार" का प्रयोग करके संघीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को निर्देशित करना चाहिए।
एनसीपीए के अनुरोध का तात्पर्य है कि ईपीएफओ द्वारा 18 जनवरी 2025 को जारी किया गया परिपत्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों के विपरीत है। परिषद का मानना है कि यह परिपत्र पेंशन हिताधिकारियों के लिए प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और उनकी आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
सेवानिवृत्त जनता की ओर से यह अपील तब आई है जब पेंशन संबंधी नीतियों में संशोधन को लेकर व्यापक चिंता व्यक्त की जा रही है। एनसीपीए ने जोर देते हुए कहा है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ परामर्श किया जाना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर उनके जीवन पर पड़ता है।
यह मामला भारत में पेंशन प्रणाली की पारदर्शिता और सेवानिवृत्त जनता के अधिकारों की रक्षा के बड़े सवाल को उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार का रुख क्या होगा, यह देखना बाकी है।