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न्यायमूर्ति कौल ने न्यायपालिका नियुक्तियों पर कॉलेजियम मतभेद का किया खुलासा

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धीरज कौल ने अपनी फाइलें बंद करते हुए भारतीय न्यायपालिका में कॉलेजियम प्रणाली के संदर्भ में सरकार की भूमिका को लेकर हुए विवादों का संदर्भ दिया है। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में आंतरिक मतभेदों का जिक्र किया।

LSN India · 28 October 2026

न्यायमूर्ति कौल ने न्यायपालिका नियुक्तियों पर कॉलेजियम मतभेद का किया खुलासा

भारतीय न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े प्रशासनिक मामलों में दशकों का अनुभव रखने वाले न्यायमूर्ति धीरज कौल ने अपने कार्यकाल को समाप्त करते समय कॉलेजियम प्रणाली में गहरे मतभेदों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। न्यायमूर्ति कौल के अनुसार, भारतीय न्यायपालिका की इस महत्वपूर्ण प्रणाली में सरकारी भूमिका को लेकर कॉलेजियम के अंदर महत्वपूर्ण असहमति रही है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 और 217 के तहत गठित कॉलेजियम प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार है। न्यायमूर्ति कौल का मानना है कि इस प्रणाली की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच स्पष्ट समझ आवश्यक है।

न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग रही है। कॉलेजियम प्रणाली के तहत नियुक्तियों में पारदर्शिता और दक्षता को लेकर विभिन्न हलकों में बहस जारी है।

न्यायमूर्ति कौल द्वारा उठाए गए ये प्रश्न न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उनके विचार न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित चल रही राष्ट्रीय बहस में एक महत्वपूर्ण योगदान हैं।