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नाना पाटेकर की अभिनय प्रतिभा को समझने के लिए 'प्रतिघात' जरूरी है
दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर की फिल्म 'प्रतिघात' में छोटी भूमिका उनकी असाधारण अभिनय क्षमता का प्रमाण है। उनके किरदार बदलने की अद्भुत कला ने भारतीय सिनेमा में एक विशिष्ट स्थान बनाया।
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नाना पाटेकर की अभिनय यात्रा की शुरुआत 'प्रतिघात' जैसी फिल्म से हुई थी जहां उन्होंने एक सीमित भूमिका निभाई थी। किंतु इस छोटे से किरदार में भी उनकी अभिनय शैली की विशिष्टता स्पष्ट झलकती थी, जो उन्हें अन्य अभिनेताओं से अलग करती थी।
'परिंदा', 'क्रांतिवीर' और 'अब तक छप्पन' जैसी महत्वपूर्ण फिल्मों ने नाना पाटेकर को एक प्रतिष्ठित अभिनेता के रूप में स्थापित किया। इन फिल्मों में उनके द्वारा निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के मन में जीवंत हैं और उनकी अभिनय प्रतिभा का जीवंत उदाहरण हैं।
नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे हर किरदार को पूरी तरह आत्मसात कर लेते थे। फिल्म देखते समय दर्शकों को नाना नजर नहीं आते थे, बल्कि सिर्फ वह किरदार दिखाई देता था जिसे वे निभा रहे होते थे। यह अभिनय की एक उच्च कला है जिसे बिरले ही अभिनेता प्राप्त कर पाते हैं।
उनके अवसान के बाद उनकी फिल्में फिर से देखने से उनकी असाधारण प्रतिभा का बोध होता है। 'प्रतिघात' से लेकर उनकी अंतिम फिल्मों तक उनके किरदार भारतीय सिनेमा के लिए एक स्थायी विरासत बन गए हैं।