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वैज्ञानिकों ने धान के पौधों को बिजली स्रोत में बदला, मीथेन उत्सर्जन में कटौती

भारतीय शोधकर्ताओं ने धान के खेतों से बिजली उत्पन्न करने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। यह प्रणाली न केवल ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि हानिकारक मीथेन गैस के उत्सर्जन को भी काफी हद तक कम करती है।

LSN India · 15 September 2026

वैज्ञानिकों ने धान के पौधों को बिजली स्रोत में बदला, मीथेन उत्सर्जन में कटौती

कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की गई है जहां वैज्ञानिकों ने धान की खेती को टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बनाया है। इस अभिनव तकनीक में पादप सूक्ष्मजीव ईंधन कोशिकाओं का उपयोग किया गया है जो धान के पौधों से सीधे विद्युत ऊर्जा निकालती हैं।

शोध दल ने सक्रिय बायोचार इलेक्ट्रोड का विकास किया है जो बिजली घनत्व में उल्लेखनीय सुधार लाता है। पारंपरिक तलछट आधारित ईंधन कोशिकाओं की तुलना में धान-आधारित प्रणाली अधिक वोल्टेज उत्पन्न करती है, जिससे इसकी व्यावहारिक दक्षता प्रमाणित होती है।

इस तकनीक का एक प्रमुख लाभ धान के खेतों से मीथेन गैस के उत्सर्जन में महत्वपूर्ण कमी है। मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इस उत्सर्जन को नियंत्रित करना पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हालांकि यह तकनीक भविष्य के लिए अत्यंत आशाजनक है, विशेषज्ञों का मानना है कि इसे बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्र में लागू करने से पहले और विकास की आवश्यकता है। यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जा सके तो भारत के लाखों किसान इससे लाभान्वित हो सकेंगे।