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हिरासत में यातना के मामलों में वृद्धि से पीपल्स वॉच चिंतित
मानवाधिकार संगठन पीपल्स वॉच ने पुलिस हिरासत में यातना की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने न्यायिक प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की है।
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मानवाधिकार संगठन पीपल्स वॉच ने पुलिस हिरासत में यातना के बढ़ते मामलों पर आशंका जताई है। संगठन के अनुसार, पिछले महीनों में इस तरह की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के संदर्भ में गंभीर चिंता पैदा करती है।
पीपल्स वॉच ने कहा है कि हिरासत में बंद व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों की व्यापक जांच की आवश्यकता है। संगठन का मानना है कि पुलिस कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी इस समस्या को गहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि हिरासत के दौरान यातना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का भी हनन है। संगठन ने अधिकारियों से कहा है कि वह पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुधार करें और हिरासत संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
पीपल्स वॉच ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच के लिए एक तंत्र स्थापित करे और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए। संगठन का मानना है कि केवल कानूनी सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही के माध्यम से ही इस व्यवस्थागत समस्या को हल किया जा सकता है।