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बचपन की देखभाल के खर्च बढ़ने से दादा-दादी निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
अमेरिका में बाल देखभाल सेवाओं का बढ़ता खर्च माता-पिता को दादा-दादी का सहारा लेने के लिए मजबूर कर रहा है। एक 67 वर्षीय शिक्षक ने अपने पोते-पोतियों की देखभाल के लिए नौकरी से सेवानिवृत्ति ले ली है।
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बचपन की देखभाल के बढ़ते खर्च ने अमेरिकी परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव डाला है। इसी समस्या से जूझते हुए मेरी जो गलुशा ने अपनी सेवानिवृत्ति को त्वरित करने का फैसला किया और डेलावेयर चले गए। गलुशा का यह कदम उस व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जहां कार्यरत माता-पिता अपनी संतानों की देखभाल के लिए बुजुर्ग सदस्यों पर निर्भर हो रहे हैं।
अमेरिका में बाल देखभाल सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। औपचारिक डेकेयर सेवाएं महंगी और दुर्लभ हैं, जिससे बहुत से परिवार वैकल्पिक विकल्प तलाश रहे हैं। इस स्थिति में दादा-दादी परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन प्रणाली बन गए हैं।
दादा-दादी द्वारा प्रदान की जाने वाली देखभाल न केवल किफायती है बल्कि लचीली भी होती है। ये बुजुर्ग सदस्य अपनी पोतियों और पोतों के साथ समय बिताने में आनंद पाते हैं और परिवार को भावनात्मक सहयोग प्रदान करते हैं। ऐसे उदाहरण दर्शाते हैं कि पारिवारिक बंधन कितने मजबूत हो सकते हैं।
गलुशा जैसे लाखों दादा-दादियों का यह त्याग समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देश की बाल देखभाल नीति में सुधार लाने की आवश्यकता स्पष्ट है, लेकिन तब तक पारिवारिक सहयोग ही कई परिवारों का आधार बना हुआ है।