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चीनी की कीमतों में उछाल, ईंधन-खाद्य मांग का अंतराल बढ़ रहा है
भारतीय अर्थशास्त्र अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की तेजी से बढ़ती मांग खाद्य और चारे की बाजार पर दबाव डाल रही है। विशेषज्ञों ने लचकदार ई20 इथेनॉल रणनीति अपनाने का आह्वान किया है।
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भारतीय अर्थशास्त्र अनुसंधान संस्थान (आईसीआरईआर) की एक नई रिपोर्ट में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी और ईंधन तथा खाद्य मांग के बीच बढ़ती खाई के बीच सीधा संबंध उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जैव ईंधन के लिए बढ़ती हुई मांग कृषि आधार को दबाव में डाल रही है, जिससे खाद्य और पशु चारे की कमी की स्थिति बन रही है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि इथेनॉल ईंधन के उत्पादन में तेजी आ रही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सीमित है। यह असंतुलन गन्ने और अन्य फसलों की मांग में वृद्धि कर रहा है, जिससे चीनी सहित खाद्य उत्पादों की कीमतें प्रभावित हो रही हैं।
आईसीआरीईआर की रिपोर्ट में एक लचकदार ई20 इथेनॉल नीति अपनाने की सिफारिश की गई है। इस रणनीति के तहत, ईंधन की मांग को पूरा करने के लिए उपलब्ध संसाधनों के साथ संतुलन बनाया जा सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर कम हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही नीतिगत उपाय नहीं किए गए, तो ईंधन और खाद्य उत्पादों की मांग के बीच यह अंतराल और भी बढ़ेगा। इससे न केवल कीमतें प्रभावित होंगी, बल्कि आम जनता की क्रय क्षमता पर भी असर पड़ेगा।