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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं को चुनौती
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की बढ़ती रिटर्न दर ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम भरे बाजारों से दूर कर दिया है। विकासशील देशों में पूंजी प्रवाह में गिरावट से भारत सहित एशियाई अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ गई हैं।
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अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को विश्व की सबसे सुरक्षित निवेश प्रणाली माना जाता है क्योंकि इसमें अमेरिकी सरकार की पूर्ण गारंटी होती है। जब इन बॉन्ड की यील्ड में वृद्धि होती है, तो वैश्विक निवेशकों का ध्यान स्वाभाविक रूप से इसी ओर खिंचा चला जाता है।
पिछले दो दशकों में ऐसी परिस्थिति दुर्लभ रही है। बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश भारत और दक्षिण एशिया की अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अमेरिका की ओर रुख कर रहा है। यह पूंजी पलायन इक्विटी बाजार, मुद्रा बाजार और कर्ज बाजार सभी को प्रभावित कर रहा है।
भारतीय रुपये में कमजोरी, शेयर बाजार में अस्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव - ये सभी वर्तमान चुनौतियों का हिस्सा हैं। संकेत यह हैं कि जब तक अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, तब तक भारत सहित विकासशील बाजारों को इस दबाव का सामना करना पड़ेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस परिस्थिति से निपटने के लिए भारतीय नीति निर्माताओं को अपनी राजकोषीय स्थिति को मजबूत करना होगा और घरेलू निवेश को प्रोत्साहित करना होगा।