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अमेरिकी उच्च बांड रिटर्न के बीच भारतीय निवेशकों की रणनीति बदल रही है
वैश्विक निवेशकों को लुभाने के लिए अब मजबूत विकास दर और स्पष्ट भविष्य दृष्टिकोण जरूरी हो गया है। कम वृद्धि वाली कंपनियों को निवेशकों का पक्ष नहीं मिल रहा है।
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अमेरिकी बांड में बढ़ते रिटर्न के कारण भारतीय शेयर बाजार में निवेश की रणनीति में बदलाव आ रहा है। तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण फर्म एमके इन्वेस्टमेंट्स के शोध में पाया गया है कि वैश्विक निवेशकों के लिए अब कम वृद्धि वाली कंपनियां आकर्षक नहीं रह गई हैं।
एमके इन्वेस्टमेंट्स ने अपनी रिपोर्ट में 15 प्रमुख शेयरों की सूची तैयार की है जो इस नई परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इस सूची में पेटीएम और अन्य महत्वपूर्ण कंपनियां शामिल हैं। फर्म के विश्लेषकों के अनुसार, अब ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनके पास मध्यम अवधि में मजबूत विकास की संभावना हो।
अमेरिकी ट्रेजरी बांड में बढ़ती पैदावार से भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश में कमी देखी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय कंपनियों को अब केवल शेयर मूल्य नहीं बल्कि स्पष्ट व्यावसायिक विकास दिखाना होगा। यह बदलाव निवेश पोर्टफोलियो बनाने वालों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
वर्तमान परिदृश्य में भारतीय शेयर बाजार में केवल उच्च विकास क्षमता वाली कंपनियों को ही विदेशी पूंजी आकर्षित करने की संभावना है। एमके की सूची में शामिल कंपनियां इसी कसौटी पर खरी उतरती हैं और आने वाले समय में बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।