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शारदीय नवरात्र 2026: मुर्गे पर मां दुर्गा की विदाई, जानें धार्मिक महत्व
शारदीय नवरात्र 2026 में देवी दुर्गा की विदाई मुर्गे पर संपन्न हो रही है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस वाहन के चयन से जुड़े शुभ-अशुभ संकेतों को समझना महत्वपूर्ण है।
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शारदीय नवरात्र के समापन पर मां दुर्गा के विभिन्न वाहनों का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों को समर्पित दिन होते हैं, और प्रत्येक दिन का अपना वाहन और धार्मिक महत्व होता है। इस बार 2026 के शारदीय नवरात्र में देवी की यात्रा का समापन मुर्गे पर हो रहा है।
हिंदू धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में मुर्गे को देवी के वाहन के रूप में विभिन्न संदर्भों में वर्णित किया गया है। परंपरागत विश्वास के अनुसार, मुर्गे का आना विभिन्न संकेतों का वहन करता है। कुछ धार्मिक विद्वान इसे शक्ति और सतर्कता का प्रतीक मानते हैं, जबकि अन्य इसे विशेष परिस्थितियों से जोड़ते हैं।
भारतीय संस्कृति में पशु-पक्षियों को दिव्य संदेशों का वाहक माना जाता है। नवरात्र पर्व के दौरान देवी के विभिन्न स्वरूपों के साथ जुड़े वाहनों की पूजा की जाती है। पंडित और धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष नवरात्र की समाप्ति का वाहन बदलता है, और इसका संबंध उस वर्ष की समग्र ऊर्जा और संभावनाओं से माना जाता है।
नवरात्र के समापन के दौरान देवी की विदाई समारोह परिवारों और समुदायों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और देवी से आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाले भक्त इन संकेतों को गंभीरता से लेते हैं और वर्ष भर की शुभता के लिए प्रार्थना करते हैं।