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मैसूर पैलेस की नवरात्रि परंपराएं रहीं जीवंत, वज्रमुष्टि कलाग दुर्लभ
मैसूर के वडियार राजपरिवार द्वारा मनाई जाने वाली नवरात्रि समारोह संपन्न हुई। इस बार परंपरागत वज्रमुष्टि कलाग प्रतियोगिता विजयदशमी के अवसर पर आयोजित नहीं की जा सकी।
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मैसूर के राजमहल में मनाई जाने वाली नवरात्रि की परंपरागत आयोजन इस बार भी अपने सांस्कृतिक वैभव के साथ संपन्न हुई। वडियार राजपरिवार की इस प्राचीन परंपरा ने इस दौरान हजारों भक्तों और परंपरा प्रेमियों को आकर्षित किया।
नौ दिवसीय समारोह के दौरान महल में देवी दुर्गा की विभिन्न रूपों की पूजा की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मैसूर की राजसी परंपरा को जीवंत रखा गया। पारंपरिक संगीत, नृत्य और धार्मिक प्रदर्शनों ने समारोह को और भी विशेष बना दिया।
हालांकि, इस वर्ष विजयदशमी के अवसर पर आयोजित होने वाली 'वज्रमुष्टि कलाग' प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जा सका। यह पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता, जिसमें जट्टी नामक संरक्षण उपकरणों का उपयोग किया जाता है, मैसूर महल की विजयदशमी परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है।
वडियार परिवार द्वारा सदियों से निभाई जाने वाली नवरात्रि परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती है। राजमहल में आयोजित इन समारोहों को दक्षिण भारत की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपराओं में स्थान दिया जाता है।