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विरोध प्रदर्शन में समाधान पर ध्यान दें, विभाजन नहीं: भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों को विभाजनकारी मुद्दों से हटकर समाधान पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने भारत और पश्चिमी देशों में होने वाले विरोध प्रदर्शन को पश्चिम से आने वाली विघटनकारी प्रवृत्ति का परिणाम बताया।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने समकालीन विरोध प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए कहा है कि ऐसे आंदोलनों में शामिल लोगों को विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर सकारात्मक समाधान की ओर ध्यान देना चाहिए।
भागवत ने भारत और पश्चिमी देशों में चल रहे विभिन्न विरोध प्रदर्शनों का संदर्भ देते हुए कहा कि ये आंदोलन एक विघटनकारी तूफान का हिस्सा हैं जो पश्चिमी देशों से उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने इन प्रदर्शनों की प्रकृति और उनके प्रभाव पर चिंता व्यक्त की।
आरएसएस प्रमुख के अनुसार, यदि विरोध प्रदर्शन सार्थक हों तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। हालांकि, वर्तमान में अधिकांश आंदोलन लोगों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े करने में सफल हो रहे हैं, जिससे सामाजिक एकता प्रभावित हो रही है।
भागवत का यह बयान उस समय आया है जब देश में विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। उन्होंने आह्वान किया कि नागरिकों को अपनी आवाज उठाते समय समाज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।