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यूजीसी समता विनियमन 2026 असंतुलित: आरएसएस ने केंद्र से निष्पक्षता की मांग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यूजीसी के नए समता विनियमों में असंतुलन की ओर ध्यान दिलाया है। संघ का कहना है कि सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को इस बारे में उनकी चिंताएं पहले ही दी जा चुकी हैं।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता सुनील अंबेकर ने यूजीसी द्वारा तैयार किए गए समता विनियमन 2026 को लेकर आपत्तियां जताई हैं। अंबेकर के अनुसार, विनियमों में महत्वपूर्ण असंतुलन है जिसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संघ ने पहले ही अपनी चिंताओं के बारे में संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया है।
अंबेकर ने जोर देते हुए कहा कि सरकार और यूजीसी दोनों को इन विनियमों के संबंध में उठाई गई बातों पर ध्यान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार इस मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। संघ का तर्क है कि समता से संबंधित किसी भी नीति में सभी हितधारकों के विचारों को संतुलित तरीके से प्रतिबिंबित होना चाहिए।
उच्च शिक्षा को लेकर संघ की ओर से लगातार सुझाव दिए जाते रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि शिक्षा नीति संबंधी किसी विनियमन पर विभिन्न संगठनों की ओर से आपत्तियां उठाई गई हों। यूजीसी के समता विनियमों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रिया शैक्षणिक समावेशन और न्याय संबंधी व्यापक बहस का हिस्सा है।