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विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार मानता है आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विपक्ष के आंदोलन के प्रति संतुलित रुख अपनाया है। संघ के शीर्ष कार्यकर्ता ने कहा कि संगठन युवाओं को सरकार के विरुद्ध नहीं देखना चाहता।

LSN India · 2 November 2026

विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार मानता है आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी समारोह के बाद एक संतुलित रुख बनाए रखते हुए विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग माना है। संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि नागरिकों को अपनी बातें रखने का अधिकार है और यह लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।

संगठन के नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन पर उनके विचार व्यावहारिक और परिपक्व हैं। उन्होंने माना है कि जनता की आवाज सुनी जानी चाहिए भले ही वह सत्ता के विरुद्ध हो। यह रुख संघ की राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।

संघ के अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण बात कही है कि युवा पीढ़ी को सरकार को विरोधी के रूप में नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार, जनतांत्रिक प्रणाली में मतभेद स्वाभाविक हैं और इन्हें शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए।

अपने शताब्दी समारोह के पश्चात संघ का यह रुख राजनीतिक सामंजस्य बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह संघ की दीर्घकालीन सामाजिक दृष्टि और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।