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संवत् 2083 में रुपये और बॉन्ड की दिशा पश्चिम एशिया पर निर्भर
आने वाले वर्ष में रुपये की मजबूती और बॉन्ड यील्ड का रुझान मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव, मुद्रास्फीति और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव कम हो तो रुपया 92 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत हो सकता है।
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संवत् 2083 की शुरुआत में भारतीय रुपये और सरकारी प्रतिभूति बाजार की गतिविधि तीन प्रमुख कारकों से प्रभावित होगी - पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, देशीय मुद्रास्फीति के स्तर और अंतर्राष्ट्रीय पूंजी प्रवाह की दिशा। विश्लेषकों के अनुसार यदि अमेरिका-ईरान के बीच विद्यमान संघर्ष में कमी आती है तो रुपया 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है, जो मुद्रा में उल्लेखनीय मजबूती दर्शाएगा।
दूसरी ओर, सरकारी बॉन्ड की यील्ड अगले वर्ष 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। यह अनुमान मुख्य रूप से देश में महंगाई दर के रुझान और भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित ब्याज दर नीति पर आधारित है। बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए आरबीआई यदि दरों में वृद्धि करता है तो बॉन्ड यील्ड में इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।
विदेशी संस्थागत निवेशकों का पोर्टफोलियो प्रवाह भी आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, विकसित देशों की मौद्रिक नीति और भारत के विकास संभावनाओं में निवेशकों का आत्मविश्वास इन प्रवाहों को प्रभावित करेंगे। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि आर्थिक स्थितियां अनुकूल रहें तो विदेशी निवेश का आगमन रुपये को और भी मजबूत कर सकता है।