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आरबीआई के चुनिंदा हस्तक्षेप से रुपये में और गिरावट संभव: विश्लेषकों का मत

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता का मानना है कि आने वाले छह महीनों में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है। रिजर्व बैंक अपनी हस्तक्षेप रणनीति को अधिक चुनिंदा बना सकता है।

LSN India · 1 October 2026

आरबीआई के चुनिंदा हस्तक्षेप से रुपये में और गिरावट संभव: विश्लेषकों का मत

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारतीय रुपये की कमजोरी जारी रहेगी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के अनुसार, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आगामी अवधि में और मजबूत दबाव का सामना कर सकता है।

इस संदर्भ में, भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा बाजार में अपनी भूमिका को पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। केंद्रीय बैंक अब हर उतार-चढ़ाव में हस्तक्षेप करने की बजाय अधिक लक्षित और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहा है। यह बदलाव मुद्रा बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

इसके अलावा, विश्लेषकों को यह भी उम्मीद है कि आने वाले महीनों में उपज वक्र (यील्ड कर्व) में ऊपर की ओर बदलाव देखने को मिल सकता है। यह बदलाव ब्याज दरों और बांड बाजार की गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।

वित्तीय बाजारों में इस तरह के बदलाव निवेशकों और व्यावसायिक संस्थाओं के लिए रणनीति तैयार करना महत्वपूर्ण बनाते हैं। अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि बाजार सहभागियों को इन संभावित परिवर्तनों के लिए तैयार रहना चाहिए।