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तेल की कीमतों में उछाल से रुपया एक हफ्ते के निचले स्तर पर आया
वैश्विक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच भारतीय रुपया कमजोर हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री से रुपये को 96 प्रति डॉलर के स्तर से ऊपर रखा जा सका।
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कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण भारतीय रुपया सोमवार को एक सप्ताह के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ाती हैं, जिससे विकसित देशों में ब्याज दरों में और भी अधिक वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति उभरती बाजार की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहां विदेशी निवेशक अपनी पूंजी को वापस बेहतर रिटर्न वाली मुद्राओं की ओर स्थानांतरित करते हैं।
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से प्राप्त निर्देशों के तहत सरकारी बैंकों ने डॉलर की बिक्री में सक्रिय भूमिका निभाई है। इस हस्तक्षेप से रुपये को 96 प्रति डॉलर के स्तर से ऊपर रखा जा सका है। केंद्रीय बैंक की ओर से समय-समय पर बाजार में हस्तक्षेप करके रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोकने की कोशिश की जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भारतीय मुद्रा पर दबाव डालती रहेंगी। तेल के आयातक देश के रूप में, भारत को कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर झेलना पड़ता है, जो रुपये की कमजोरी का एक प्रमुख कारण बन सकता है।