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रुपया 95.96 पर गिरा, जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट
भारतीय रुपया पांचवें कारोबारी सत्र में लगातार कमजोर हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक बांड यील्ड और अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग ने रुपये को दबाव में रखा है।
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विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया बुधवार को 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 95.96 के स्तर पर बंद हुआ। यह जुलाई 14 के बाद से रुपये की सबसे तेज गिरावट है, जो मौजूदा आर्थिक चुनौतियों को दर्शाता है।
रुपये की कमजोरी का एक प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है। साथ ही, विश्व भर में सरकारी बांडों की यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों का पोर्टफोलियो तुरंत लाभ के लिए स्थानांतरित हो गया है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग ने उदीयमान बाजार की मुद्राओं पर व्यापक दबाव डाला है।
घरेलू मुद्रा की इस निरंतर गिरावट का कारण बहु-स्तरीय बाहरी कारक हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। वैश्विक सूचकांकों में अनिश्चितता की स्थिति विदेशी पूंजी के प्रवाह को बाधित कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में स्थिरता और वैश्विक बाजारों में सुधार के बिना रुपये पर दबाव बना रह सकता है। व्यापार और निवेशकों को आने वाले समय में विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।