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ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत से आ रहा है 73% ऋण की मांग
जेनरेशन जेड, अनौपचारिक श्रमिक और सूक्ष्म उद्यम भारतीय उधार बाजार में तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं। एक नई रिपोर्ट में भारत के आकांक्षी उपभोक्ताओं के बदलते चेहरे का संकेत मिलता है।
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भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से आने वाली ऋण की मांग देश के कुल आकांक्षी ऋण का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा बनाती है। यह रुझान दिखाता है कि भारतीय वित्तीय प्रणाली में आर्थिक सुधार कहां हो रहा है और किन क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन बढ़ रहा है।
जेनरेशन जेड के सदस्य, जो डिजिटल रूप से अधिक सक्षम हैं, अब ऋण बाजार में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं। इसी तरह, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों श्रमिक भी साख सुविधाएं हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। छोटे और सूक्ष्म उद्यमों के संचालक भी उधार देने वालों के लिए एक बढ़ता हुआ आकर्षक बाजार बन गए हैं।
ऋण देने वाली संस्थाएं इन नए उपभोक्ता समूहों को पहचान रही हैं और उन्हें सेवा देने के लिए अपनी रणनीति को ढाल रही हैं। डिजिटल तकनीक और वैकल्पिक डेटा का उपयोग करके, उधारदाता अब उन गांवों और कस्बों में पहुंच रहे हैं जहां पारंपरिक बैंकिंग सेवाएं सीमित थीं।
यह विकास भारत के आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेजी से औपचारिक वित्तीय प्रणाली के साथ जुड़ रही है। निकट आने वाले वर्षों में, इन उभरते बाजारों में साख विस्तार की गति बनी रहने की उम्मीद है।