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ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए कृषि से परे सोचना होगा: IFAD प्रमुख
अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष के प्रमुख अल्वारो लारियो का मानना है कि भारत के ग्रामीण समुदायों को आजीविका के लिए केवल खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, बहुआयामी आर्थिक गतिविधियों में निवेश से ही ग्रामीण आय में वास्तविक वृद्धि संभव है।
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संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख संस्था IFAD के प्रमुख अल्वारो लारियो का कहना है कि ग्रामीण भारत की आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि-केंद्रित नीतियों से आगे बढ़ना आवश्यक है। उनका मत है कि देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली बड़ी आबादी आजीविका के लिए विभिन्न स्रोतों पर निर्भर है, केवल खेती पर नहीं।
लारियो के अनुसार, भारतीय गांवों में कई तरह की आर्थिक गतिविधियां पहले से चल रही हैं। पशुपालन, छोटे व्यापार, कारीगरी और अन्य सेवा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वह मानते हैं कि इन क्षेत्रों को सही नीतिगत समर्थन और निवेश मिले तो ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
भारत की ग्रामीण अर्थनीति को मजबूत करने के लिए लारियो का सुझाव है कि सरकार और विकास संगठनों को कृषि के साथ-साथ अन्य व्यवसायिक अवसरों के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करके ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
यह दृष्टिकोण पारंपरिक खेती-आधारित सोच से हटकर एक समग्र विकास मॉडल प्रस्तुत करता है। लारियो का विश्वास है कि इस बहुआयामी दृष्टिकोण से न केवल ग्रामीण आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन भी कम होगा।