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ग्रामीण भारत दोपहिया वाहनों की मांग का मुख्य चालक, पेट्रोल का दबदबा बरकरार
भारत के ग्रामीण इलाकों में दोपहिया वाहनों की पंजीकरण का 55 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ शहरी क्षेत्रों की तुलना में आधी रह गई है।
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भारत में दोपहिया वाहनों की बढ़ती मांग का केंद्रबिंदु ग्रामीण बाजार बन गया है। देश भर में दोपहिया वाहनों की कुल पंजीकरण में ग्रामीण क्षेत्रों का योगदान 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो इस सेगमेंट में उनकी बढ़ती खरीद क्षमता का संकेत देता है।
हालांकि ग्रामीण भारत में दोपहिया वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का प्रभुत्व अभी भी पूरी तरह कायम है। पेट्रोल वाहन अभी भी कुल दोपहिया पंजीकरण का 94 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जो इस बाजार में ईंधन विकल्प की प्राथमिकता दर्शाता है।
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की पैठ के मामले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्पष्ट अंतर देखने को मिल रहा है। शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रचलन लगभग आधा रह गया है, जो बुनियादी ढांचे और खरीद क्षमता में अंतर को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ते पेट्रोल मॉडल और विस्तृत सर्विस नेटवर्क के कारण ग्रामीण भारत में पेट्रोल वाहन अभी भी प्राथमिकता पाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में आने के लिए चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार और कीमतों में कमी जैसी चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।