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उत्तर और मध्य भारत के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे का संकट
ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। शिक्षकों की कमी और टूटी-फूटी इमारतें बच्चों की शिक्षा में बाधा बन रही हैं।
LSN India ·

उत्तर और मध्य भारत के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंताएं उजागर हुई हैं। चार राज्यों से किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अधिकांश विद्यालयों में दीवारें, शौचालय और ब्लैकबोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। यह स्थिति लाखों बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर डाल रही है।
रिपोर्टों में शिक्षकों की भारी कमी भी उजागर हुई है। कई स्कूलों में निर्धारित संख्या से कहीं कम शिक्षक हैं, जिससे कक्षाओं में छात्रों की संख्या अत्यधिक है। इससे शिक्षकों का ध्यान व्यक्तिगत छात्रों की ओर नहीं जा पाता और पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
भवन संरचना की स्थिति भी चिंताजनक है। कई स्कूलों की दीवारें दरकी हुई हैं, छत टूटी हुई है और कक्षाएं अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में संचालित हो रही हैं। स्वच्छता सुविधाओं का अभाव स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या को बढ़ा रहा है, विशेषकर लड़कियों को।
इस व्यापक समस्या के समाधान के लिए संरचनागत सुधार और संसाधनों में वृद्धि की तत्काल आवश्यकता है। राज्य सरकारें स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, भवन मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।