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महिला-अनुकूल क्षेत्र का विरोधाभास: घरेलू काम में पुरुषों से सात गुना ज्यादा समय

ग्रामीण भारत में महिलाएं प्रतिदिन घरेलू कामकाज और देखभाल में लगभग 286 मिनट व्यतीत करती हैं, जो पुरुषों के समय का सात गुना अधिक है। यह असमानता उन क्षेत्रों में भी बनी हुई है जहां महिलाओं की भागीदारी बढ़ने का दावा किया जाता है।

LSN India · 1 September 2026

महिला-अनुकूल क्षेत्र का विरोधाभास: घरेलू काम में पुरुषों से सात गुना ज्यादा समय

भारत के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के समय का उपयोग करने का तरीका उस प्रगति के विरोधाभास को उजागर करता है जिसकी बात विकास क्षेत्र में की जाती है। नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण महिलाएं प्रतिदिन 286 मिनट से अधिक समय घरेलू कामकाज, बच्चों की देखभाल और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों में लगाती हैं।

इसके विपरीत, ग्रामीण पुरुषों द्वारा इसी तरह के कामों में बिताया जाने वाला समय नगण्य है। यह अंतर न केवल आर्थिक असमानता को दर्शाता है, बल्कि महिलाओं के समय संसाधन पर भी गहरा असर डालता है, जिससे उनके शिक्षा, कौशल विकास और आय सृजन के अवसर सीमित हो जाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि कृषि और ग्रामीण विकास परियोजनाएं महिला-अनुकूल हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि घरेलू बोझ के कारण महिलाएं इन अवसरों का पूरी तरह लाभ नहीं उठा पाती हैं। यह प्रवृत्ति सामाजिक संरचना और पारंपरिक भूमिकाओं में गहराई से निहित है।

नीति निर्माताओं के लिए चुनौती केवल आर्थिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू कामकाज के बोझ को साझा करने की सामाजिक मानसिकता में बदलाव लाना भी है। बिना इस मौलिक परिवर्तन के, महिलाओं के विकास के पहलू अधूरे रहेंगे।