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भारत को तेल बिक्री पर दबाव डालने की रूस ने की आलोचना
रूसी राजदूत ने भारत को तेल बिक्री के मामले में अंतरराष्ट्रीय दबाव की आलोचना की है। यह टिप्पणी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी की हाल ही की मुलाकात के बाद आई है।
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रूस के राजदूत ने भारत के साथ तेल व्यापार के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय दबाव के रणनीति की कड़ी आलोचना की है। दूतावास के प्रवक्ता के अनुसार, रूसी तेल की भारत को बिक्री एक वैध व्यावसायिक लेन-देन है जिसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
राजदूत की यह टिप्पणी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की हाल ही की बैठक के बाद सामने आई है, जहां राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक-दूसरे से मिले थे। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।
भारत पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रूसी तेल पर निर्भर रहा है। रूसी पक्ष का मानना है कि यह सहयोग दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी है और यह आर्थिक साझेदारी को मजबूत करता है।
राजदूत ने जोर देते हुए कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग दोनों देशों की आंतरिक नीतियों का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तीसरे पक्ष के दबाव से द्विपक्षीय व्यावसायिक संबंधों को प्रभावित नहीं किया जा सकता।