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राजस्थान के सरिस्का में हनुमान-भीम मिलन की पौराणिक स्मृति
महाभारत काल की अज्ञातवास अवधि में राजस्थान के अलवर जिले में भीम का अहंकार तोड़ने के लिए हनुमान जी प्रकट हुए थे। सरिस्का के घने जंगल में स्थित इस पौराणिक स्थल को पांडुपोल के नाम से जाना जाता है।
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महाभारत की प्रसिद्ध कथाओं में से एक राजस्थान के अलवर जिले की सरिस्का वन क्षेत्र से जुड़ी है। माना जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इसी क्षेत्र में आए थे, जहां भीम को अपनी शक्ति और सामर्थ्य का अत्यधिक अहंकार था।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, भीम के इसी घमंड को दूर करने के लिए भगवान हनुमान इसी स्थान पर प्रकट हुए थे। हनुमान जी और भीम के बीच हुआ यह परिचय महाभारत के महत्वपूर्ण प्रसंगों में से एक माना जाता है, जहां भीम को अपनी शक्ति की वास्तविकता का अहसास हुआ था।
पौराणिक विवरणों के अनुसार, इसी क्षेत्र में भीम ने अपनी गदा से पहाड़ को तोड़कर एक मार्ग का निर्माण किया था। इसी मार्ग और इसी स्थान को पांडुपोल के नाम से संबोधित किया जाता है, जो आज भी राजस्थान के सरिस्का वन में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का एक प्रमुख स्थल है।
यह क्षेत्र महाभारत काल की घटनाओं से जुड़ी विरासत को संजोए हुए है और स्थानीय भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान के रूप में माना जाता है।