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स्लीपर बसों के नियम कागजों तक सीमित, सड़कों पर असली चुनौती बरकरार

केंद्र सरकार ने यात्री बसों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम लागू किए हैं, लेकिन ग्रेटर नोएडा में बस आग की घटना इन नियमों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अनुपालन की कमी सड़कों पर गंभीर खतरा बनी हुई है।

LSN India · 24 September 2026

स्लीपर बसों के नियम कागजों तक सीमित, सड़कों पर असली चुनौती बरकरार

यातायात सुरक्षा नियमों में कसाव के बावजूद, स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में स्लीपर बसों के लिए अग्निरोधी सामग्री, सुरक्षित निकास द्वार और अन्य सुरक्षा मानकों का स्पष्ट विवरण दिया गया है। इसके अलावा, स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स पर भी कड़ा नजरिया रखने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, सड़क पर वास्तविकता कुछ और ही दिखाई देती है। कई बसें अभी भी न्यूनतम सुरक्षा मानदंड पूरा नहीं करती हैं। अनुपालन की जांच में अक्सर कमजोरियां देखी जाती हैं, जहां सुरक्षा उपकरण अपर्याप्त या गलत तरीके से लगाए जाते हैं। निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्रियां अक्सर निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता की होती हैं।

रोड सेफ्टी विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों को सख्ती से लागू करना जरूरी है। नियमित निरीक्षण, कठोर दंड और जवाबदेही तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही, बस निर्माताओं और ऑपरेटरों को गुणवत्ता के प्रति जागरूक बनाना भी महत्वपूर्ण है।

हालिया घटनाओं ने दिखाया है कि कागजों पर बने नियम तब तक कारगर नहीं हो सकते जब तक उन्हें जमीन पर सख्ती से लागू न किया जाए। सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपेक्षा की जा रही है।