LSN News › India

Sport · India Bureau

चार दशक बाद भी रामानंद सागर का रामायण बना लोगों के दिल में सर्वोच्च

4000 करोड़ रुपये की लागत से बनी आधुनिक रामायण प्रस्तुतियां भी रामानंद सागर की क्लासिक सीरीज के मुकाबले खरी नहीं उतर पाई हैं। भारतीय दर्शकों की सामूहिक स्मृति में यह सीरीज आज भी विशेष स्थान बनाए हुए है।

LSN India · 6 November 2026

रामानंद सागर द्वारा निर्मित रामायण ने 1987 से 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित होकर भारतीय टेलीविजन का इतिहास रचा था। चार दशक बाद आज भी यह सीरीज लाखों भारतीयों के दिलों में एक विशेष स्थान रखती है और पीढ़ियों को जोड़ने का माध्यम बनी हुई है।

हाल के वर्षों में विभिन्न निर्माताओं ने उच्च बजट और आधुनिक तकनीक के साथ महाभारत और रामायण जैसी परंपरागत कथाओं को नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इन प्रस्तुतियों पर 4000 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए हैं, किंतु दर्शकों की गहरी भावनात्मक जुड़ाव और स्वीकृति के मामले में वे रामानंद सागर की मूल कृति के समकक्ष नहीं बन सकीं।

इस घटना का विश्लेषण करने वाले मीडिया विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बजट और तकनीकी सुधार ही किसी निर्माण को अमर नहीं बना सकते। रामानंद सागर की सीरीज ने जो भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया था और जिस तरह से उसने भारतीय परिवारों को एक साथ बैठने के लिए प्रेरित किया, वह एक सांस्कृतिक घटना बन गई थी।

वर्तमान समय में जब डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर नई सामग्री निरंतर प्रसारित हो रही है, रामानंद सागर की रामायण पुनः प्रसारण के माध्यम से दर्शकों को आकर्षित करती रहती है। यह सीरीज न केवल मनोरंजन का माध्यम रहा, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक पहचान का प्रतीक बन गया है।