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सर्वपितृ अमावस्या: पितृपक्ष की समाप्ति और पूर्वजों को विदाई देने का अंतिम दिन
सर्वपितृ अमावस्या पितृपक्ष के समापन का दिन है जब धरती पर आए पूर्वजों को विदाई दी जाती है। इस दिन तिलांजलि, दान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है।
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पितृपक्ष के सोलह दिनों का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है। इस दिन को पूर्वजों को सम्मानपूर्वक विदाई देने का आखिरी अवसर माना जाता है। वर्ष भर में जिन पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण नहीं किया जा सके, उनके लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर किए गए दान और श्राद्ध कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन तिलांजलि देने, गरीबों को भोजन कराने और दान-पुण्य करने से आत्मिक शांति मिलती है तथा पारिवारिक कष्टों का निवारण होता है।
पितृपक्ष के दौरान नियमित श्राद्ध और तर्पण न कर पाने वाले लोगों के लिए सर्वपितृ अमावस्या पूर्वजों को प्रसन्न करने का अंतिम मौका होती है। विद्वानों के अनुसार, इसी दिन सभी पितरों को एकसाथ विदा किया जाता है। इस दिन किए गए कार्य पूरे वर्ष के लिए परिवार की शांति और समृद्धि सुनिश्चित करते हैं।