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सऊदी अरब का चीन की ओर रुख, अमेरिका के लिए चुनौती
अनुभव से सीखते हुए सऊदी अरब अब चीन के करीब जा रहा है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस बदलाव को स्वीकार कर पाएगा।
LSN India ·
मध्य-पूर्व के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्षों के अनुभव और कूटनीतिक सीखने के बाद रियाद अब चीन के साथ अपने संबंधों को गहरा करने का रुझान दिखा रहा है। इस कदम में आर्थिक और भू-राजनीतिक हित दोनों दिख रहे हैं।
सऊदी अरब के लिए चीन की ओर रुख तार्किक निर्णय माना जा रहा है। चीन के साथ व्यापार, निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग सऊदी अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। विश्व की बढ़ती शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना रियाद की रणनीति का हिस्सा बन गया है।
हालांकि इस नीति परिवर्तन से अमेरिका को लेकर सवालें उठ रहे हैं। दशकों से सऊदी अरब के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाले वाशिंगटन के लिए यह नया समीकरण चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। क्या अमेरिका मध्य-पूर्व में अपने रणनीतिक सहयोगी की यह नई दिशा स्वीकार करने के लिए तैयार है, यह प्रश्न अभी अनुत्तरित है।
वैश्विक भू-राजनीति के इस नए दौर में सऊदी अरब जैसी प्रभावशाली शक्तियों का बहुध्रुवीय विदेश नीति अपनाना क्षेत्रीय संतुलन को नया आकार दे सकता है। आने वाले समय में इस परिवर्तन के प्रभाव भारत सहित पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में महसूस किए जा सकते हैं।