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सऊदी अरब के किंग खालिद एयरपोर्ट पर हूती हमला, रक्षा क्षमता पर उठे सवाल
83 अरब डॉलर के रक्षा बजट के बावजूद सऊदी अरब के प्रमुख हवाई अड्डे पर हूतियों का घातक हमला देश की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। इस घटना में 13 लोगों की मौत हुई है और 300 से अधिक घायल हुए हैं।
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रियाद स्थित किंग खालिद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती मिलिशिया के हमले ने सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को केंद्र में ला दिया है। यह हमला उस समय हुआ जब सऊदी अरब के नेतृत्व में पाकिस्तान और तुर्की जैसी शक्तियों के साथ एक सामरिक गठबंधन सक्रिय है।
यमन से संचालित हूती समूह के इस हमले में कम से कम 13 लोगों की जान चली गई और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के प्रयासों के बावजूद हमलावरों को निशाना साधने में सफलता मिली, जिससे देश की सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षा एवं बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठ गए हैं।
सऊदी अरब प्रतिवर्ष अपने रक्षा बजट में भारी निवेश करते हुए उन्नत सैन्य प्रणालियों और प्रौद्योगिकी का अधिग्रहण करता है। तथापि, यह घटना सीमावर्ती क्षेत्र में गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के प्रबंधन में देश की कमजोरी को प्रदर्शित करती है।
इस घटना के बाद प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या क्षेत्रीय सहयोगिता के माध्यम से गठित किए गए समझौते ऐसी तुरंत चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम हैं। सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए अधिक समन्वित और तीव्र कार्रवाई की आवश्यकता है।