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यूपीआई के बढ़ते लेनदेन के लिए निवेश जरूरी, न्यूनतम एमडीआर मददगार: एसबीआई चेयरमैन
एसबीआई के अध्यक्ष सीएस सेट्टी ने कहा कि यूपीआई की बढ़ती मात्रा को संभालने के लिए बैंकों को निवेश करना होगा। उन्होंने माना कि न्यूनतम एमडीआर से बैंकों को मदद मिल सकती है, बशर्ते उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क से बचाया जाए।
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भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूपीआई की भूमिका को लेकर बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श जारी है। बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट 2026 में भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष सीएस सेट्टी ने कहा कि यूपीआई के बढ़ते लेनदेन को संभालने के लिए बैंकों को बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश करना पड़ रहा है।
सेट्टी के अनुसार, न्यूनतम मर्चेंट डिसकाउंट रेट (एमडीआर) से बैंकिंग क्षेत्र को उनकी बढ़ती तकनीकी और परिचालन लागतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस तरह के किसी भी कदम को उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ संतुलित किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को अतिरिक्त शुल्क का बोझ न पड़े।
यूपीआई प्रणाली ने भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांतिकारी बदलाव लाया है और लेनदेन की मात्रा में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। हालांकि, इसी तेजी के साथ बैंकों के लिए अवसंरचना और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ी है।
सेट्टी का यह वक्तव्य एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करता है कि कैसे डिजिटल भुगतान प्रणाली की स्थायित्व को सुनिश्चित करते हुए वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को भी पूरा किया जाए। भारतीय रिजर्व बैंक और नीति निर्माताओं को इस संतुलन को बनाए रखना होगा।