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जीडीपी वृद्धि दर पर गलतफहमी दूर करते हुए एसबीआई के विश्लेषक
एसबीआई के प्रमुख अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने चेतावनी दी है कि पुरानी श्रृंखला के आधार पर भारत की जीडीपी वृद्धि का आकलन करने में गंभीर त्रुटियां हो सकती हैं। उन्होंने सही तुलना के लिए नई आधार वर्ष की संख्याओं का उपयोग करने पर जोर दिया है।
LSN India ·
भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने देश की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर प्रचलित गलतफहमियों पर संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय आय के संबंध में की जाने वाली तुलना में पुरानी डेटा श्रृंखला के आधार पर किए गए दावे भ्रामक साबित हो सकते हैं।
घोष के अनुसार, सबसे हाल की तिमाही के लिए जीडीपी आंकड़े 88.3 लाख करोड़ रुपये दर्ज किए गए हैं। इसी अवधि की पिछली वर्ष की तुलना के लिए संशोधित आंकड़े 80.4 लाख करोड़ रुपये हैं। घोष ने यह रेखांकित किया है कि समान आधार वर्ष पर आधारित आंकड़ों की ही तुलना की जानी चाहिए ताकि आर्थिक विकास का सही आकलन संभव हो सके।
भारत के सांख्यिकीय डेटा में हाल के वर्षों में कई बार आधार वर्ष में परिवर्तन किए गए हैं, जिससे विभिन्न समयावधि के आंकड़ों की तुलना करना जटिल हो गया है। एसबीआई के इस विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि आर्थिक नीति निर्माताओं और टिप्पणीकारों को मौजूदा आधार वर्ष के डेटा का ही उपयोग करते हुए सावधानीपूर्वक निष्कर्ष निकालने चाहिए।
घोष की टिप्पणी इस बात का संकेत है कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर पर सार्वजनिक और मीडिया में की जाने वाली चर्चाओं में सतर्कता की आवश्यकता है। सही आंकड़ों के आधार पर ही अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर सामने आ सकती है।