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एसबीआई सॉफ्टवेयर में ईसाइयों को अनुसूचित जनजाति विकल्प नहीं दे रहा
अरुणाचल प्रदेश के ईसाई मंचों का आरोप है कि भारतीय स्टेट बैंक का सॉफ्टवेयर धर्म दर्ज करने पर स्वचालित रूप से अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को सामान्य श्रेणी में वर्गीकृत कर देता है।
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अरुणाचल प्रदेश क्रिश्चियन फोरम ने भारतीय स्टेट बैंक के खाता खोलने और केवाईसी अपडेट की प्रक्रिया में एक गंभीर खामी की ओर इशारा किया है। फोरम के अनुसार, अनुसूचित जनजाति से संबंधित ईसाई आवेदकों को जब खाता खोलने के दौरान अपना धर्म दर्ज करना पड़ता है, तो बैंक का सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से उन्हें सामान्य श्रेणी में वर्गीकृत कर देता है। इससे इन आवेदकों को अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाले विभिन्न सुविधाओं और छूट से वंचित किया जा रहा है।
यह समस्या केवल खाता खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि केवाईसी अपडेट के दौरान भी यही स्थिति बनी रहती है। अरुणाचल प्रदेश, जहां ईसाई धर्म के अनुयायी एक बड़ी आबादी में शामिल हैं, वहां कई अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य ईसाई धर्म में विश्वास रखते हैं। इस तरह के सॉफ्टवेयर में आई खामी से उन्हें आवंटित लाभ प्राप्त नहीं हो रहे हैं।
एसबीआई के सॉफ्टवेयर में यह त्रुटि संविधान द्वारा दी गई सुरक्षा और आरक्षण व्यवस्था के उल्लंघन का प्रतीक है। अरुणाचल प्रदेश क्रिश्चियन फोरम का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली को धर्म और जाति दोनों को स्वतंत्र रूप से पहचानने और दर्ज करने की अनुमति देनी चाहिए ताकि लाभार्थियों को उनके हक मिल सकें।