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किशोर न्याय कानून के कार्यान्वयन में खामियां: न्यायाधीश नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बीवी नागरत्ना ने किशोर न्याय कानून के कार्यान्वयन में बड़ी खामियों को चिन्हित किया है। उन्होंने कहा कि कानून कागज पर तो स्पष्ट है, लेकिन जमीन पर उसका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा।
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सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बीवी नागरत्ना ने किशोर न्याय प्रणाली के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। अपनी टिप्पणी में उन्होंने कहा कि वर्तमान कानून अपने लिखित स्वरूप में बड़ी हद तक स्पष्ट है।
हालांकि, न्यायाधीश नागरत्ना ने किशोर न्याय कानून में किसी भी तरह का सुधार या संशोधन की मांग नहीं की है। उनका मत है कि मौजूदा कानूनी ढांचा पर्याप्त है और समस्या इसके कार्यान्वयन में निहित है।
न्यायाधीश की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि केंद्र और राज्य सरकारों को किशोर न्याय प्रणाली के कार्यान्वयन में सुधार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रशिक्षण, संसाधन और निगरानी तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।
किशोर न्याय विधि का उद्देश्य किशोरों के सुधार और पुनर्वास को सुनिश्चित करना है। लेकिन व्यावहारिक स्तर पर इन प्रावधानों का सही ढंग से पालन न होने से कानून की भावना खो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर कार्यान्वयन से ही किशोर न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाया जा सकता है।