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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को 8 अक्टूबर तक निर्णय लेने का निर्देश दिया
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष को अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए 8 अक्टूबर की समय सीमा निर्धारित की है। न्यायालय ने कहा है कि तीन महीने का समय सामान्य परिस्थितियों में उचित है।
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नई दिल्ली - भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष को विधायकों की अयोग्यता संबंधी लंबित याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक की समय सीमा दी है। न्यायपीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तीन महीने का अवधि किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय होना चाहिए।
न्यायालय के निर्देश के अनुसार, यदि कोई असाधारण परिस्थितियां न हों तो विधानसभा अध्यक्ष को इस निर्धारित अवधि के भीतर अपना निर्णय जारी करना आवश्यक है। इस आदेश का उद्देश्य लंबित याचिकाओं में देरी को समाप्त करना और न्यायिक प्रक्रिया को गति प्रदान करना है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कई विधायकों की अयोग्यता से संबंधित याचिकाएं विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप इन लंबित मामलों में देरी की समस्या को हल करने के लिए किया गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई असाधारण कारण हों तो अध्यक्ष को इसकी जानकारी प्रदान करनी होगी। हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना जाएगा और इससे अधिक विलंब को न्यायसंगत नहीं ठहराया जाएगा।