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सोशल मीडिया पोस्ट पर गैंगस्टर कानून लागू करना दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट
न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि राज्य की शक्ति का दुरुपयोग सताने या धमकाने के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर जब राजनीतिक प्रेरणा काम कर रही हो। सुप्रीम कोर्ट ने एक सांप्रदायिक हिंसा के मामले में गैंगस्टर कानून के उपयोग को गैरकानूनी करार दिया है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सांप्रदायिक हिंसा की एक घटना में गैंगस्टर विरोधी कानून का इस्तेमाल करने को राज्य की शक्तियों का दुरुपयोग बताया है। न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के कानूनों का प्रयोग सामाजिक माध्यम पर की गई एक पोस्ट की वजह से भड़की हिंसा में नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य को प्रदत्त शक्तियों का उपयोग किसी व्यक्ति को सताने या धमकाने के लिए एक साधन के रूप में नहीं किया जा सकता, विशेष रूप से तब जब राजनीतिक उद्देश्य काम कर रहे हों। न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि ऐसे मामलों में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
यह फैसला सरकारी एजेंसियों द्वारा कानूनों के दुरुपयोग को लेकर उठने वाली चिंताओं को संबोधित करता है। अदालत ने पाया कि विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई हिंसा से निपटने के लिए गैंगस्टर कानून का सहारा लेना उचित नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की कार्रवाई को कानून के दायरे के बाहर बताया है।
इस निर्णय से सुरक्षा एजेंसियों को सख्त कानूनों का प्रयोग करते समय अधिक सावधानी बरतने का संदेश मिलता है। अदालत ने जोर दिया कि ऐसे कानूनों का इस्तेमाल केवल उन मामलों में किया जाना चाहिए जहां वास्तविक गैंगस्टर गतिविधियां या आपराधिक षड्यंत्र शामिल हों।