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स्कार्लेट मैकॉ तोतों की प्रजनन समस्या: वैज्ञानिक हस्तक्षेप से बचाव
स्कार्लेट मैकॉ तोते अपने सबसे कमजोर संतानों को जानबूझकर भूखा रखने की प्रवृत्ति दिखाते हैं। संरक्षण विशेषज्ञ इन चूजों को अलग रखकर प्रजाति के संरक्षण में सफलता हासिल कर रहे हैं।
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भारतीय उपमहाद्वेश में प्रवासी पक्षी अध्ययनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने वाला एक महत्वपूर्ण संरक्षण कार्यक्रम दक्षिण अमेरिका में चल रहा है। स्कार्लेट मैकॉ तोतों की जनसंख्या बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक टीमें एक अनोखी समस्या का सामना कर रही हैं—मादा तोते अपने सबसे कमजोर और छोटे चूजों को जानबूझकर भूखा रखती हैं।
इस प्राकृतिक व्यवहार को समझते हुए, पेरू और अन्य क्षेत्रों में संरक्षण केंद्रों ने एक सफल रणनीति विकसित की है। जैसे ही इन कमजोर चूजों की पहचान की जाती है, उन्हें तुरंत अलग कर दिया जाता है और कृत्रिम रूप से पाला जाता है। इससे अन्यथा मर जाने वाली संतान बच जाती है।
पेरू में आयोजित किए गए प्रायोगिक कार्यक्रमों से उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। इस हस्तक्षेप विधि के माध्यम से स्कार्लेट मैकॉ की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार यह पद्धति विलुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुई है।
इस सफलता से प्रेरित होकर अन्य क्षेत्रों में भी समान कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि प्राकृतिक व्यवहार को समझना और उसमें वैज्ञानिक तरीके से हस्तक्षेप करना संरक्षण का मुख्य मूलमंत्र है।